इंदौर में दूषित पानी पीने से 12 लोगों की मौत के मामले ने प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी मामले में जब एक पत्रकार ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछा, तो उनके जवाब ने नया विवाद खड़ा कर दिया। मंत्री ने पत्रकार से कहा— “फोकट की बात मत करो, घंटा हो गया क्या?”
मंत्री के इस बयान के सामने आने के बाद उनकी भाषा शैली और संवेदनशीलता को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे गंभीर मामले में गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया है और पीड़ित परिवारों के प्रति असंवेदनशील करार दिया है।
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यह पहला मौका नहीं है जब कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी वे कई बार सार्वजनिक मंचों और मीडिया के सामने दिए गए बयानों के कारण आलोचना झेल चुके हैं। ताजा बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि जनप्रतिनिधियों को जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर किस तरह की भाषा और मर्यादा का पालन करना चाहिए।

