Monday, 18th December 2017

प्रश्न आत्मा का परमात्मा से

Tue, Sep 19, 2017 7:02 PM

-जिस तरह चुनती हूँ मैं 
    पूजा के फूल अगली सुबह 
     हे देव ! क्या तुम भी इसी तरह 
    चुनते हो आत्मा के फूल मुरझाए हुए ?
    जिस तरह रखती हूँ मैं 
    बदले में उसके सुहासित पुष्प 
    हे देव ! क्या तुम भी इसी तरह 
    बदलते हो कलेवर को ?
    यह छोटी सी क्रिया मेरा पूजन है 
    कुछ अर्पण है तेरे नाम का 
    क्या तेरी क्रिया भी पूजन है 
    और ये मन्त्र है बदलाव का ?
   जिस तरह  करती हूँ जप 
    रखती हूं व्रत तेरे नाम का 
    शेष शय्या पर लेटे हुए
   या पुष्प पर बैठे हुए 
   क्या स्मरण तुझे मेरे नाम का ?
   हम इस धरा के सूक्ष्म से
   नभ ,थल और जलचर
   पृथ्वी के घूर्णन संग फिरते है हम, हर पल 
   जन्म - मरण के इस चक्र में 
   हे देव ! क्या  रूप बदल 
   करते हो भ्रमण हमारे लिए ?
-------------विशाखा 

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