Monday, 18th December 2017

राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय से हजारों फिल्में ‘लापता’

Mon, Sep 18, 2017 7:34 PM

नईदिल्ली : राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय (एनएफएआई) का मुख्य उद्देश्य भारतीय फिल्मों और विश्व सिनेमा को सहेजना है.राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय (एनएफएआई) में से न सिर्फ भारतीय बल्कि विश्व सिनेमा की क्लासिक श्रेणी में शामिल होने वाली कई फिल्में गायब हैं एक अंग्रजी अखबार में छपी विस्तृत रिपोर्ट बताती है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जद में आने वाली यह सरकारी संस्था, सिनेमा की अमर कृतियों को संरक्षित करने के प्रति कितनी उदासीन है.रिपोर्ट के मुताबिक सत्यजीत रे से लेकर अकीरा कुरोसावा जैसे फिल्मकारों की तकरीबन 9,200 फिल्में इस संस्था के संग्रहालय से ‘लापता’ हैं. संस्था के रिकॉर्ड्स में इनकी एंट्री होने के बावजूद फिल्म रील के 51,500 कैन और 9,200 से ज्यादा प्रिंट्स संग्रहालय में मौजूद नहीं हैं. ऊपर से 1,112 फिल्में ऐसी हैं जिनकी रिकॉर्ड्स में कोई एंट्री नहीं है, लेकिन वे पुणे स्थित इस नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया की इमारत में मौजूद हैं!इन लापता फिल्मों में सैकड़ों ऐसी हैं जो महान फिल्मकारों की अनमोल और ऐतिहासिक कृतियां हैं. सत्यजीत रे की ‘पाथेर पांचाली’, ‘अपराजितो’ व ‘चारुलता’ से लेकर मेहबूब खान की ‘मदर इंडिया’, राज कपूर की ‘मेरा नाम जोकर’ व ‘आवारा’, मृणाल सेन की ‘भुवन शोम’ और गुरु दत्त की ‘कागज के फूल’ के सेल्यूलाइड प्रिंट्स संस्था में मौजूद नहीं हैं. विश्व सिनेमा की धरोहर ‘बॉयसिकल थीव्ज’ भी नहीं है और रोमन पोलैंस्की की ‘नाइफ इन द वॉटर’ से लेकर अकीरा कुरोसावा की ‘सेवन समुराई’ भी नदारद है.इसके अलावा यह सरकारी संस्था अपनी मर्जी से 1995 और 2008 में कुल 28,401 फिल्म रीलें नष्ट कर चुकी है.
पुराने दौर में तो ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों के नेगेटिव इसलिए भी नष्ट हो जाते थे क्योंकि फिल्मों की रील में चांदी मौजूद होती थी. अपनी जिन फिल्मों में निर्माता की दिलचस्पी नहीं होती, वे उन फिल्मों को कबाड़ियों को बेच देते थे और कबाड़ी उन फिल्म रीलों को नष्ट कर उनमें से चांदी निकाल लिया करते थे.
कुछ आंकड़ों के मुताबिक, 1964 से पहले बनी भारतीय फिल्मों में से 70-80 प्रतिशत फिल्में हम खो चुके हैं. न उनके निगेटिव मौजूद हैं न ही कोई डुप्लीकेट कॉपी. इसलिए अब ये फिल्में सिर्फ सामान्य ज्ञान के तौर पर फिल्म इतिहास का हिस्सा हैं, न कि चलती-फिरती-नाचती-गाती छवियों के रूप में.

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