Monday, 18th December 2017

दुष्कर्म के आरोपी को जमानत : जज निलंबित

Sat, Apr 29, 2017 4:51 PM

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे और दुष्कर्म के आरोपी गायत्री प्रजापति को जमानत देने वाले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश मिश्र को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निलंबित कर दिया है. लखनऊ की विशेष पॉक्सो (बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाला कानून) अदालत में सुनवाई की अध्यक्षता करते हुए मिश्र ने मंगलवार को प्रजापति और दो अन्य की जमानत मंजूर की थी.
मिश्र को उनके रिटायरमेंट के दो दिन पहले ही निलंबित करते हुए हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ विभागीय जांच भी बिठा दी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल यह जांच करेंगे. हाईकोर्ट के महापंजीयक डीके सिंह ने इन आदेशों की पुष्टि की है. इससे पहले उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को प्रजापति व अन्य को जमानत देने संबंधी आदेश पर भी रोक लगा दी थी. यह आदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी. भोंसले ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया था.सरकार ने महाधिवक्ता वीके शाही के मार्फत दायर याचिका में दलील दी थी कि सत्र अदालत ने अभियोजन पक्ष को आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया. इसके अलावा प्रजापति ने जमानत की मांग करते हुए जो दलील दी, वह भी झूठी है. उन्होंने कहा है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है. जबकि उन पर छह मामले चल रहे हैं. लिहाजा, आरोपियों की जमानत रद्द की जाए.
सरकार के इन तर्कों पर को हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया. चीफ जस्टिस ने जमानत आदेश पर रोक लगाते हुए विशेष अदालत के जज द्वारा आरोपियों को ‘जल्दबाजी में जमानत’ देने के तरीके पर भी सवाल उठाए थे. इन्हीं के मद्देनजर मिश्र के खिलाफ निलंबन आदेश जारी करते हुए जांच बिठाई गई.
गौरतलब है कि चित्रकूट की एक महिला ने इसी साल 17 फरवरी को गौतमपल्ली थाने में प्रजापति और उनके दो अन्य साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रजापति और उनके साथियों ने उनके साथ कई महीनों तक दुष्कर्म किया. उनकी नाबालिग बेटी को भी अपनी हवस का शिकार बनाया. इसी मामले में प्रजापति और उनके साथी फिलहाल जेल में हैं.

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