Monday, 23rd October 2017

राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान वार्षिकोत्सव का आयोजन

Tue, Mar 21, 2017 5:31 PM

 भोपाल: मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा संचालित मानित विश्विद्यालय राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान परिसर में आज  वार्षिकोत्सव का आयोजन हुआ जिसमें मध्यप्रदेश शासन के स्वतन्त्र प्रभार मंत्री माननीय श्री विश्वास सांरग मुख्य अतिथि, भोपाल की पूर्व महापौर-भाजपा की प्रदेश महामंत्री माननीया कृष्णा गौर विशिष्ट अतिथि एवं मध्यप्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक माननीय श्री सुभाष चन्द्र त्रिपाठी सारस्वत अतिथि थे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता रा.सं.सं. भोपाल परिसर के प्राचार्य प्रो. एम. चन्द्रशेखर ने की।मुख्य अतिथि श्री विश्वास सांरग ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि छात्र जीवन में समय का सही प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण होता है। अध्ययन के साथ-साथ खेल कूद, सांस्कृतिक व अन्य गतिविधियों में भाग लेने से ही व्यक्तित्व का समुचित विकास होता है। छात्रों को चाहिए कि जिस क्षेत्र में रूचि हो उस पर अधिक ध्यान देते हुए अन्य गतिविधियों में भी भाग लें और अध्ययन पर भी पूरा–पूरा ध्यान दें। इस प्रकार के समय प्रबंधन से तनाव समाप्त होता है और चित्त–स्थिर व शांत रहता है। विशिष्ट अतिथि माननीया कृष्णा गौर ने इस अवसर पर समस्त छात्र छात्राओं को प्रेरित किया कि वे अपने संसाधनों का उचित प्रयोग करते हुए यथा संभव प्रयास करें कि उनका अपना भविष्य भी सुनहरा हो साथ ही साथ वे समाज व राष्ट्रनिर्माण में भी अपना योगदान दे सकें। विद्यार्थी राष्ट्र का भविष्य होते हैं यदि सभी विद्यार्थी अपने बहुमूल्य जीवन का महत्व समझते हुए राष्ट्रनिर्माण में सकारात्मक योगदान देते हैं तब भारत वर्ष के विकास रथ की गति दोगुनी हो जाएगी। सारस्वत अतिथि श्री सुभाष चन्द्र त्रिपाठी ने सभी छात्र छात्राओं को अनुशासन का महत्व समझाया। उनका कहना था कि यदि व्यक्ति अपने छात्र जीवन में अनुशासन का पालन करता है तो वह जीवन पर्यन्त अनुशासित रहता है और एक नियमबद्ध जीवन शैली उसे स्वस्थ, समृद्ध व सुखी बनाती है।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में परिसर के प्राचार्य प्रो. एम.चन्द्रशेखर ने समस्त छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे विस्तृत दृष्टिकोण का विकास करते हुए परिवार, समाज व राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के छात्रों की राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी अधिक होती है क्योंकि उन्हें न सिर्फ राष्ट्र की प्राचीन धरोहर को सहेजना होता है अपितु उन्हें उस धरोहर से प्राप्त ज्ञान को समकालीन बनाकर राष्ट्र की उन्नति में इसे उपयोग में लाना होता है। इस प्रकार संस्कृत के छात्र संस्कृति के संरक्षक व संवाहक होने के साथ-साथ राष्ट्र का गौरव होते हैं उनके कड़े परिश्रम रूपी कठिन तप के तेज से देश को ऊर्जा प्राप्त होती है। इस अवसर पर परिसर में वर्ष भर में हुई शैक्षिक, क्रीड़ा व सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरुस्कृत किया गया। काव्य कण्ठ पाठ, भाषण, स्फूर्ति, शलाका, चित्र निर्माण आदि शैक्षिक प्रतियोगिताओं में 23 छात्र व 07 छात्राओं को, खो-खो,कबड्डी, बालीवॉल, दौड़, भाला फेंक आदि क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में 44 छात्र व 29 छात्राओं को तथा रंगोली, नृत्य, गायन, वादन आदि प्रतियोगिताओं में 07 छात्र व 11छात्राओं को पुरुस्कृत किया गया।कार्यक्रम की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में नाट्यशास्त्र अनुसंधान केन्द्र भोपाल परिसर के तत्वावधान में भोपाल परिसर के छात्र-छात्राओं द्वारा पूर्व रंग का मंचन किया गया। इसके पश्चात छात्र-छात्राओं द्वारा संस्कृत नाटक तण्डुलप्रस्थीयम् की प्रस्तुति हुई। इस नाटक को प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी ने लिखा है जिसमें अन्न व जल के महत्व को दर्शाया गया है। नाटक यह संदेश देता है कि ना सिर्फ अकाल व सूखे के समय बल्कि सामान्य परिस्थितियों में भी जीवन में अन्न व जल ही सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होते हैं अतः हम सभी को इनका उचित प्रयोग करना चाहिए। भोपाल परिसर के प्राचार्य प्रो. एम. चन्द्रशेखर के मार्गदर्शन में प्रो. जनार्दन प्रसाद पाण्डेय ‘मणि’, डॉ. सनन्दन कुमार त्रिपाठी एवं डॉ. देवेन्द्र पाठक ने इस नाटक का सफल निर्देशन किया। इसमें आयुष दीक्षित, कल्याणी फगरे, अनुपम गर्ग, प्रतिभा, नलिनी जैना, सचिन मिश्रा, निखिल शर्मा, संगीत रावत, महिमा राजौरिया, पंकज तिवारी आदि छात्र छात्राओं ने अभिनय किया। नाटक में संगीत डॉ. संजय द्विवेदी का था। यह नाटक दिल्ली में हुए राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुका है।

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