Monday, 23rd October 2017

ये हैं छत्तीसगढ़ के गौरव तिवारी

Fri, Feb 3, 2017 6:35 PM

 रायपुर : इन दिनों छत्तीसगढ़ सरकार भी एक आईपीएस अफसर के कामकाज को लेकर परेशां है जैसे एमपी में कटनी हवाला काण्ड को उजागर करने वाले गौरव तिवारी को लेकर शिवराज सरकार परेशान  है । दरअसल इनके कामकाज का तरीका भी गौरव तिवारी की तरह है इसलिए वो सरकार की आँख की किरकिरी बने हुए है  के नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर के विवादित पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) शिवराम प्रसाद कल्लूरी को राज्य सरकार ने लंबी छुट्‌टी पर भेज दिया है. एक खबर के मुताबिक सरकार ने गुरुवार की शाम दो आदेश जारी किए. पहले में कहा गया कि स्वास्थ्य के आधार आईजी कल्लूरी के लिए एक फरवरी से 90 दिन की छुट्‌टी मंजूर की जाती है. दूसरे आदेश में कहा गया कि अब पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) और 2003 बैच के आईपीएस पी सुंदर राज बस्तर (दंतेवाड़ा) रेंज का जिम्मा संभालेंगे.
आदेश जारी होते ही कल्लूरी ने व्हाट्स एप पर एक पोस्ट की. इसमें लिखा, ‘प्रिय दोस्तो. मुझे अनिश्चित अवधि तक छुट्‌टी पर जाने के लिए कहा गया है. मैं आप सब से मिले समर्थन के लिए बहुत अाभारी हूं.’ एक अन्य ग्रुप में उन्होंने लिखा, ‘बेला भाटिया जीत गईं.’ बताते चलें कि बेला भाटिया नक्सल प्रभावित इलाकों में काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उनके घर पर हाल में ही काफी तोड़-फोड़ की गई थी. माना जा रहा है कि यह घटना पुलिस के उकसावे पर हुई थी.
कल्लूरी को जून 2014 में बस्तर रेंज का आईजी बनाया गया था. उसके बाद से वे लगातार विवादाें में रहे हैं. सरकार के ही आंकड़ों के मुताबिक उनके ढाई साल के कार्यकाल में 135 नक्सलियों को मुठभेड़ में मारा गया जबकि 1,210 ने आत्मसमर्पण कर दिया. हालांकि पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता और शोधकर्ता इन आंकड़ों पर सवाल उठाते रहे हैं. इनमें कई मुठभेड़ों को फर्जी माना गया. सरकार की एक समिति के मुताबिक महज तीन फीसदी आत्मसमर्पण ही केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तय मानकों के मुताबिक थे.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी इन मामलों को गंभीरता से लिया. हाल में ही आयोग की एक टीम बस्तर के पेडगेल्लूर और बेल्लम गांवों में गई थी. इस टीम ने वहां उन आदिवासी महिलाओं के बयान दर्ज किए थे जिन्होंने पुलिसकर्मियों पर बलात्कार, यौन और शारीरिक हमले का आरोप लगाया था. इसी महीने अपनी एक अंतरिम रिपोर्ट में आयोग ने पुष्टि की थी कि ये 16 महिलाएं राज्य पुलिस द्वारा बलात्कार और यौन व शारीरिक हमले की पीड़ित हैं. आयोग ने पेडगेल्लूर और बेल्लम नेंद्रा पर राज्य सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी.
इस तरह की ज्यादतियों पर सवाल उठाने वाली बेला भाटिया और सोनी सोरी जैसी कार्यकर्ताओं, नंदिनी सुंदर और अर्चना विजय सरीखी शिक्षाविदों और मालिनी सुब्रमण्यम जैसी पत्रकारों के साथ पुलिस का रवैया बहुत गैरजिम्मेदाराना रहा. एचआरसी के अध्यक्ष जस्टिस एचएल दत्तू की अगुवाई वाली बेंच इन मामलों में सुनवाई भी कर रही है. आयोग ने पिछले साल 17 नवंबर को कल्लूरी और राज्य के मुख्य सचिव को सख्त शब्दों में नोटिस जारी किया था. इसमें दोनों अधिकारियों को 15 दिन के भीतर पेश होने का आदेश दिया गया था. इसमें कहा गया था, ‘ऐसा लगता है, जैसे किसी को उकसाकर नंदिनी सुंदर और अर्चना विजय के खिलाफ हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई हो. यह पुलिस के पिछली द्वेषपूर्ण कार्रवाइयों जैसा ही काम है.’
उस वक्त 30 नवंबर को एनएचआरसी में होने वाली सुनवाई से पहले ही कल्लूरी बीमार पड़ गए थे. उन्हें तुरंत आपात स्थिति में विशाखापट्‌टनम के केयर हॉस्पिटल ले जाया गया जहां उनका दिल और गुर्दे का इलाज हुआ था. वे एक महीने बाद काम पर लौटे लेकिन एनएचआरसी के सामने पेश नहीं हुए और कोई न कोई बहाना बनाते रहे. इस पर और बस्तर में पुलिस ज्यादतियों के मसले पर आयोग ने बीती 30 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की खूब खिंचाई की थी. इसके बाद तुरंत कल्लूरी को छुट्‌टी दे दी गई.
हालांकि राज्य सरकार कह रही है कि कल्लूरी ने खुद छुट्‌टी मांगी थी. लेकिन सूत्रों के मुताबिक उनको छुट्‌टी की अर्जी देने का निर्देश दिया गया था. इस सिलसिले में  कल्लूरी से प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने भी कहा, ‘सरकार ने मुझे जो करने के लिए कहा है, मैं करूंगा. अन्यथा मैं एकदम ठीक हूं.’

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