Monday, 23rd October 2017

प्रश्न आत्मा का परमात्मा से

-जिस तरह चुनती हूँ मैं      पूजा के फूल अगली सुबह       हे देव ! क्या तुम भी इसी तरह      चुनते हो आत्मा के फूल मुरझाए हुए ?     जिस तरह रखती हूँ मैं      बदले में उसके सुहासित पुष्प     ...

जिज्ञासा

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष  मुझे तो तेरे मुकुट पर फूल गोकर्ण का  मोरपंख सा लगता है , कृष्ण बता , तुझे ये कैसा लगता है ? मुझे तो तेरी मुरली की धुन  अब भी सुनाई देती है , कृष्ण बता अब भी तू क्या  ग्वाला बन के फिरता है ? तुझे तो मैं कई दशकों  ...

दूरदर्शन भोपाल के इंजिनियर एस श्रीनिवास “तेलुगु गजल पुरस्कार 2017” से सम्मानित

भोपाल : तेलुगु सांस्कृतिक परिषद् द्वारा  भोपाल में आयोजित भव्य समारोह में गुराजाड़ा फेडरेशन अमेरिका ने  श्री आर वही एस एस श्रीनिवास  को तेलुगु गजल साहित्य में की गई सेवाओ के लिए “ तेलुगु गजल पुरस्कार 2017” से सम्मानित किया  है |  . इस अवसर पर  श्री श्रीनिवास...

आदम और वृक्ष

झील के कोने से सटा हुआ ,अपनी परछाई से सना हुआ  एक आदम और एक वृक्ष  दोनों ही थे जमे हुए , अपने क्षेत्र में रमे हुए , एक तना हुआ  एक झुका हुआ  एक आदम और एक वृक्ष  दोनों के हृदय में चहचहाहट हुई  कई पक्षियों की बसाहट हुई  कुछ नीड़ रीता छोड़ गए&...

विशाखा की कलम से

लालन - पालन  --------------------------- माँ हूँ मै तुम्हारी अपने कर्तव्य करती रहती हूँ  उपस्थित हूँ तुम्हारे , सम्मुख हूँ तुम्हारे  तो ध्येय भरती रहती हूँ , माँ हूँ मै तुम्हारी ....... कोख से तुम मुझसे विभक्त हुए  गर्भनाल टूटी तुम धरा पर जन्म हुए  ममत्व का तुमने...

World dance day -

नृत्य  ~~~~~~~~~~~~~~~~ शिव के सम्मुख नृत्य है । आकाश में नृत्य है , सूर्य , चंद्र , आकाशगंगाओं का  नेपथ्य में भी चलता नृत्य है । अलौकिक है  , असीम है , अनंत है , नृत्य है । धरा पर भी नृत्य है । सूर्य किरणों का नृत्य है  रज -रज में नृत्य है , कण -कण में नृत्य है ।...

विशाखा की कलम से

 आत्मनिरीक्षण  ________________________ दिवारों के कैनवास पर तस्वीरें उकेरते लोग  कुछ जिंदा , कुछ मुर्दा आँखे लिए लोग  हर चेहरे को घूरते , कुछ पूँछते लोग  धरती से स्वर्ग का रास्ता ढूँढते लोग  वो क्या जाने चित्रगुप्त ने हिसाब किया बंद  स्वर्ग और नर्क का क...

विशाखा की कलम से

दोहन  _____________________________ कभी धरती एक कुआँ  इसमें से निकाले हमने अमूल्य रत्न , तेल , पानी , कोयला  और ना जाने क्या -क्या । कभी धरती हुई सपाट , रोपी हमने मनचाही फसलें  उजाड़ कर उसका सौन्दर्य । कभी धरती हुई ढलान , बही वहाँ अमृत की धारा  कल -कल -कल ,...

पानी महंगा हो चला

विश्व जल दिवस पर विशाखा की कविता  खून सस्ता और पानी महंगा हो चला है , एक लाल से गुलाबी दूजा रंगहीन से मटमैला हो चला  बोतलों में पानी  , सड़कों पर खून बह चला , एक जरुरी और एक नागवार हो चला । अब पानी पहचाना जा रहा है कई नामो से , खून बह रहा कई रगों में बेनामो से । आगे चलकर प...

लेखक का घर

विश्व कविता दिवस पर कवियत्री विशाखा द्वारा लेखको को समर्पित कविता  ___________ लेखक का घर बोलता है , अक्षरों और शब्दों का नाद रहता है । हर एक कोना एक कहानी कहता है , सजीव हो या निर्जीव गूढ़ अर्थ होता है । अचानक कहीं से मुक्तक सम्मुख आता है  नई कविता से मिलकर वो गज़ल बन जाता है&n...

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